नमस्ते दोस्तों!
आजकल खबरों में छाया हुआ है – Union Minister शिवराज सिंह जी चौहान का बयान कि अब हमारे देश में फल, सब्जियां और फूलों का आयात रोक सकते है। इसका मतलब? किसानो को अपने जमीन पर ज्यादा से ज्यादा उत्पादन करना होगा। लेकिन सवाल ये है – सिर्फ एक ही फसल लगाने से ये कैसे होगा?
यह हो सकता इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम (Integrated Farming System – IFS) से
ये वो तरीका है जिसमें आप एक ही छोटी-सी खेत में पर कई प्रकार के फमिंग एक साथ-साथ करते हैं – जैसे फसल, गाय-भैंस, मुर्गी, मछली, सब्जी, फल, और कभी-कभी मधुमक्खी पालन भी। इसे ? खर्च कम, कमाई ज्यादा, होगी और मिट्टी भी स्वस्थ भी रहेगी है।
2026 में ये मॉडल भारत के छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह गेम-चेंजर बन रहा है। चलिए, स्टेप बाय स्टेप समझते हैं।इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम से

इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम क्या है?
इंटीग्रेटेड फार्मिंग यानी “सब कुछ जुड़ा हुआ खेती”। एक फार्म पर 2-5 अलग-अलग काम एक साथ चलते हैं, ताकि एक का कचरा दूसरे का खाना बन जाए।
उदाहरण:
- आपकी फसल के अवशेष (भूसा, पत्ता) → गाय-भैंस के लिए चारा
- गाय-भैंस का गोबर से → खेत में जैविक खाद
- तालाब में मछली + बत्तख → तालाब का पानी सिंचाई के लिए और बत्तख की बीट खाद
- फल के पेड़ों के नीचे सब्जियां या मुर्गियां
ये सब मिलकर एक “क्लोज्ड लूप” बनाते हैं – कम से कम बहार से खाद-दवा खरीदनी पड़ती है।
इंटीग्रेटेड फार्मिंग के 7 बड़े फायदे है
- कमाई 2-3 गुना बढ़ सकती है – सिर्फ अनाज से नहीं, दूध, अंडा, मछली, मीट, और फल-सब्जी से भी
- खर्च 30-40% तक कम – गोबर से खाद, अवशेष से चारा, पानी रिसाइकल
- मिट्टी की सेहत सुधरती है – जैविक खाद से उर्वरता बढ़ती है, रासायनिक खाद कम
- जोखिम कम – एक फसल खराब हो तो दूसरा काम चलेगा (जैसे दूध/अंडा साल भर आता है)
- पर्यावरण बचता है – कम केमिकल, कम पानी बर्बाद, कार्बन कम
- परिवार को पौष्टिक भोजन – घर पर ही दूध, अंडा, सब्जी, फल
- सरकारी मदद मिल रही है – PM-KISAN, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, और अब आत्मनिर्भर भारत के तहत IFS को प्रमोट किया जा रहा है
2025-26 के स्टडीज के मुताबिक, IFS से संसाधन उपयोग 30% बेहतर होता है और जलवायु परिवर्तन से 25% ज्यादा सुरक्षा मिलती है।
इंटीग्रेटेड फार्मिंग के मुख्य घटक (Components)
| घटक | क्या करता है | उदाहरण (भारत में आम) |
|---|---|---|
| फसल उत्पादन | मुख्य आधार – अनाज, दाल, तिलहन | धान-गेहूं, मक्का, दलहन, सरसों |
| बागवानी | फल-सब्जियां साल भर | आम, अमरूद, केला, टमाटर, भिंडी, बैंगन |
| पशुपालन | दूध, गोबर, ड्राफ्ट पावर | गाय, भैंस, बकरी |
| मुर्गी/बत्तख पालन | अंडा, मीट, खाद | देशी मुर्गी, ब्रॉयलर, बत्तख |
| मत्स्य पालन | मछली + तालाब का पानी सिंचाई के लिए | रोहू, कतला, पंगास |
| मधुमक्खी पालन | शहद + परागण से फसल बढ़ोतरी | सरसों/सूरजमुखी के साथ |
| वर्मीकम्पोस्ट/जैविक खाद | गोबर से कम्पोस्ट | वर्मी बेड |
रियल लाइफ उदाहरण – भारत के सफल IFS मॉडल
- पंजाब/हरियाणा मॉडल – धान + गेहूं + डेयरी + मुर्गी → सालाना 8-12 लाख कमाई (2-3 एकड़ पर)
- महाराष्ट्र/मध्य प्रदेश – सोयाबीन + कपास + बकरी + फल (अमरूद/आंवला) + मधुमक्खी
- दक्षिण भारत (तमिलनाडु/केरल) – नारियल + मसाले + मछली तालाब + बत्तख → बहुत कम पानी में अच्छी कमाई
- नागपुर के आसपास (महाराष्ट्र) – संतरा/संतरा + सब्जियां + गाय + मुर्गी → लोकल मार्केट में डायरेक्ट बिक्री
कैसे शुरू करें इंटीग्रेटेड फार्मिंग? (स्टेप बाय स्टेप)
- अपनी जमीन, पानी और बजट देखें (1-2 एकड़ से भी शुरू कर सकते हैं)
- मुख्य फसल चुनें (जो लोकल मार्केट में चलती हो)
- 1-2 एक्स्ट्रा कंपोनेंट ऐड करें – जैसे गाय + मुर्गी या तालाब + मछली
- जैविक तरीके अपनाएं – गोबर खाद, नीम का कीटनाशक
- सरकारी स्कीम चेक करें – सब्सिडी मिलती है तालाब, गोशाला, मुर्गी शेड पर
- लोकल मार्केट या ऑनलाइन (e-NAM) से बेचें
अंत में –
क्योंकि आज आत्मनिर्भर भारत का समय है। फल-सब्जी आयात रोकने की बात हो रही है, तो हमें खुद उत्पादन बढ़ाना है। इंटीग्रेटेड फार्मिंग वो रास्ता है जो छोटे किसान को बड़ा बनाता है – बिना ज्यादा जमीन, बिना ज्यादा कर्ज।
आप क्या सोचते हैं? क्या आपने कभी IFS ट्राय किया है? कमेंट में बताएं – आपकी जमीन कितनी है और कौन-सा कंपोनेंट ऐड करना चाहेंगे?
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I’m Ashish Kumre, Founder of Jai Krishi and a Computer Science engineer working in the Cooperative Department. I have hands-on experience with farmer documentation, banking procedures, and government welfare schemes, which gives me real-world insight into what truly helps farmers and how to complete applications smoothly.
Through this blog, my mission is to deliver accurate, well-researched agricultural information so every farmer can access the right schemes on time and receive their full benefits. 🌾🚜